७३ के वावजूद भी सीखने कि चाहत नहीं गई – अमिताभ बच्चन

महानायक अमिताभ बच्चन की उम्र ७३ साल होने के वाबजूद भी उनकी चुस्ती फुर्ती किसी जवान व्यक्ति से कम नहीं है, उनकी एक्टिंग, उनकी आवाज़ के तो करोड़ो चहेते हैं यही कारण है कि बॉलीवुड में वो सबसे व्यस्त अभिनेता हैं। २०१६ के शुरूवात में आई उनकी फ़िल्म “वज़ीर” जिसे लोगो ने काफी सराहा। एक्टिंग तो जैसे उनमे कूट-कूट कर भरी हो फिर भी वो आज भी कहते हैं कि उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना है। हाल ही में रिलीज हुई उनकी थ्रिलर फ़िल्म “तीन” (TE3N) जिसे लोग पसंद कर रहें हैं।
सुजॉय घोष की फ़िल्म TE3N के सिलसिले में महानायक अमिताभ बच्चन से बात करने का मौका मिला और बहोत सारी बातें हुई जो आपसे साझा कर रहा हूं।

सर! फ़िल्म तीन “(TE3N) के बारे में बताये?
यह एक कोरियन फिल्म का रीमेक है। कहानी एक वृद्ध परिवार की है, जिसकी पोती के साथ एक दुर्घटना हो जाती है। मेरा किरदार एक एंग्लो बंगाली है। उसका नाम जॉन बिस्वॉस है। कलकत्ते में रहता है। बूढ़ा और कमजोर है। दिक्कत यह है कि वह जानना चाहता है कि उसकी पोती के साथ जो हादशा हुआ है उसके पीछे कौन लोग हैं। उसका एक प्रयत्न रहता है कि वह पता करे कि क्या हुआ था।

ये फ़िल्म आपको कैसे मिली?
सुजॉय मुझे लेकर फ़िल्म बनाना चाहते थे, उन्होंने मुझे इसकी कहानी सुनाई तो मैंने हां करदी, मुझे लगा की यह बहुत ही अच्छी कहानी है और एक दिलचस्प फ़िल्म बन सकती है।

कोई नया कलाकार जिसके साथ आप काम करना चाहते हों?
हां, मैं सब के साथ काम करना चाहूँगा। जैसे कि आप रणबीर सिंह, रणबीर कपूर, वरुण धवन आदि इन सब के साथ काम करना चाहूँगा। अवसर मिलना चाहिए। ये सब बहुत मंजे हुए कलाकार हैं।

आपने इस फ़िल्म में स्कूटर चलाना सीखा या पहले से जानते थे?
स्कूटर तो बहुत पहले कॉलेज में चलाया करते थें, लेकिन माहिर नहीं था। वो तो जब यहां फिल्मो में आये तब मोटरसाइकिल चलाया। इस फ़िल्म में कहा गया की आपको स्कूटर चलानी है तो काफी प्रॉब्लम हुई, मैंने कहा मुझे एक स्कूटर दे दो और मैं रात को चलाना सीखने लगा ताकि जब सीन हो तो रियल लगे।

निर्देशक रिभु दास गुप्ता नए निर्देशक हैं यह उनकी पहली फ़िल्म है, जबकि इस फ़िल्म में मंजे हुए कलाकार है तो इस फ़िल्म में काम करके आपका अनुभब कैसा रहा?
हम इतने परिपूर्ण, अनुभवी नहीं हैं, जैसा कि मैंने कहा था मैं आज भी सीखता हूँ। हमें भी चिंता रहती है कि कल काम पर जाना है, सीन कैसा होगा। ये सब बातें हमें भी परेशान करती हैं। वैसे ये अच्छी परेशानी है तब हम कोशिश करते हैं कि हम जो काम करने जा रहे हैं वो सही हो। फिर साथ में जब ऐसे कलाकार हों, जो इतने सक्षम हैं और इतने खूबसूरत तरीके से काम करते हैं तो उनके सामने यह भय भी रहता है कि कहीं हम कुछ गलत न कर दें। हम उनसे सीखते हैं।

और क्या क्या आप सीखना चाहते हैं?
सीखना तो बहोत कुछ चाहता हूँ, कोई वाद्य यंत्र जैसे पियानो, सितार वगैरह, भाषाएं हैं, जो सीखना चाहूँगा। महाराष्ट्र में रहते हुए इतने साल हो गए लेकिन अभी तक मराठी नहीं सीख पाया। समझ लेता हूँ पर बोल नहीं पाता। विदेशी और कुछ अपने देश का ही भाषा सीख जाऊं।

पहले और अब के दौर की फिल्मो में क्या बदलाव देख रहे हैं, अब फ़िल्म भी हिट या फ्लॉप आकड़ो में होने लगा है कि किस फ़िल्म ने कितना कलेक्शन किया?
पहले और अब में काफी फर्क है, पहले कौन सी फ़िल्म कितना दिन चलता था वो मायने रखता था, अब तो तुरंत रिजल्ट सामने आ जाता है। अब डिजिटल हो गया है कई कैमरा यूज करते हैं इस से काफी सुगम हो गया है।

458303-te3n

 

 

 

 

 

पुरुषोत्तम सिंह

 

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  1. indiacineadmin on 06/14/2016 at 8:02 am said:

    great interview

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और क्या क्या आप सीखना चाहते हैं?
सीखना तो बहोत कुछ चाहता हूँ, कोई वाद्य यंत्र जैसे पियानो, सितार वगैरह, भाषाएं हैं, जो सीखना चाहूँगा। महाराष्ट्र में रहते हुए इतने साल हो गए लेकिन अभी तक मराठी नहीं सीख पाया। समझ लेता हूँ पर बोल नहीं पाता। विदेशी और कुछ अपने देश का ही भाषा सीख जाऊं।

पहले और अब के दौर की फिल्मो में क्या बदलाव देख रहे हैं, अब फ़िल्म भी हिट या फ्लॉप आकड़ो में होने लगा है कि किस फ़िल्म ने कितना कलेक्शन किया?
पहले और अब में काफी फर्क है, पहले कौन सी फ़िल्म कितना दिन चलता था वो मायने रखता था, अब तो तुरंत रिजल्ट सामने आ जाता है। अब डिजिटल हो गया है कई कैमरा यूज करते हैं इस से काफी सुगम हो गया है।

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