विनाश के कोख से ही, विकाश का जन्म होता है – आयशा शेख

भोजपुरी फिल्मों में आजकल जिस प्रकार का परिवर्तन आ रहा है और जिस प्रकार नारी प्रधान फिल्में भी बन रही हंै और सफल हो रहीं हंै, उसे देखकर सुखद आश्चर्य होना स्वभाविक है। यह बात उस समय बहुत सटीक लगी, जब फिल्म ‘यादव जी’ के बारे में बताते हुए, फिल्म में आइटम नम्बर कर चुकी, आयशा शेख ने मिलते ही काफी उत्साहपूर्वक बताना शुरु किया।
आयशा जी! फिल्मों में स्तरहीन आयटम गीतों की बढ़ती संख्या के बारे में आपका क्या कहना है ?
रवि जी! शायद दाल-चावल की तरह रुखा-सूखा खाना दर्शकों को पसंद नही है। उन्हे लगता है कि कुछ चटपटा, स्पाइसी हो जाए, इसलिए दिखाना पडता है……
यानि आप भी मानती हैं कि फिल्में, आयटम नंम्बर के बिना चल नही सकती ?
हाँ….निश्चय ही ऐसे गानें यदि फिल्म की कथा को ध्यान में रखकर, शालीनता के साथ लिखें और फिल्माए जाए तो सार्थक होगें। पुरानी फिल्मों में भी ऐसे गाने होते थे।ayesha 2
पर आयशा जी! उन्हे आयटम नंम्बर नही, मुज़रा कहा जाता था, मुज़रे का फिल्मांकन काफी शालीनता के साथ होता था ?
हाँ यह सच है, मुज़रे की अपनी कुछ अलग ही रवायत और रिवायत होती थी। उसमें शलीनता का पुट भी होता था। जरुरत वैसे ही गीतों के पिक्चराइजेशन की है।
आपको नही लगता कि, फिल्मों से बाहर आइटम सांग की उमर तो होती है, पर लम्बी नही होती ?
डेफनेटली यू आर राइट, गीतकारों को चाहिए कि, वे अपने गानों में द्विअर्थी शब्दों की भरमार न करें। यदि सबकुछ दायरे में रहकर, परर्दे में, परर्दे पर दिखाया जाय तो पब्लिक इसे इंज्वाय करेगी।
आयशा जी! अगर आपको कहीं मुख्य भूमिका मिले तो क्या, प्रतिकिया होगी आपकी?
प्रतिकिया यही होगी, अच्छे-से-अच्छा करुँ। कामेडी, एक्शन ड्रामा करना पसंद करुगी
अपनी फिल्म ‘यादव जी’ के बारे में बताएं ?
यादव जी के निर्देशक हैं, संजय श्रीवास्तव। पहली फिल्म होने की वजह से मैं काफी घबराई हुई थी। पर संजय जी ने सब कुछ चुटकियों में संभाल लिया। संजू काफी सहयोगी किस्म इंसान हैं।
अपनी आने वाली फिल्म के बारे में ‘इंडिया सिने न्यूज’ के पाठकों को कुछ बताएं ?
एक गुजरती फिल्म ‘ठाकुरनो कौल जग में अनमोल’, मार्च-अप्रैल में रिलीज हो रही है। फिल्म के निर्माता निमेश पटेल हैं। फिल्म में मुख्य खलनायक की भूमिका फिरोज इरानी ने निभायी है, जिनके साथ मेरा आईटम डान्स काफी फेमस होगा। इसके अलावा अवधी-भोजपुरी मिश्रित युवराज फिल्म क्रियेशन की एक फिल्म, ‘एगो प्रेम प्रतिज्ञा’ करने जा रही हँू। इसे साउथ के एक डायरेक्टर, के. आर. रहमान डायरेक्ट कर रहे हैं। इसके कोरियोग्राफर हैं मनोज मस्ताना, जिनके साथ मैनें पहले भी एक फिल्म, भोजपुरिया नायक ‘द बास’ की है। फिल्म के डायरेक्टर, जजित साहू हैं। ‘बलम बलवान’ फिल्म में मैनें आईटम साॅग के साथ-साथ ही एक्ट भी कर रही हूँ। प्रोड्यूसर अब्बास अली अंसारी और डायरेक्टर मिथिलेश अविनाश की इस फिल्म मे मुख्य भूमिका विनय आनन्द ने निभायी है।
क्या आपको नही लगता अब ज्यादा ज्यादा नारी चरित्र प्रधान फिल्में बननी चाहिए?
आज भोजपुरी या अन्य भाषा में जो फिल्में बन रही है, उनमें नारी प्रमुखता से उभर के आ रही है। यह सुखद् परिवर्तन की बेला है और सतयुग से होता आया है और अब कलियुग में हो रहा है कि विनाश के कोख से ही, विकास का जन्म होता है। मै समझती हूँ सब कुछ नार्मली हो रहा है। जरुरत इस परिवर्तन को सही नजरिये से देखने की है।
आखिर में ‘इंडिया सिने न्यूज’ के पाठकों और अपने दर्शकों से क्या कुछ कहना चाहेंगी ?
दर्शकों से बस ‘आई लव यू’ क्योकि आपसे हम हैं। आपका स्नेह और प्यार ही, मेरा आधार है। ‘इंडिया सिने न्यूज’ के लिए हमारी मनोकामना यही है कि यह दिन दूनी और रात चैगुनी उन्नति करे। आप सबको मेरा प्यार भरा आदाब!

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क्या आपको नही लगता अब ज्यादा ज्यादा नारी चरित्र प्रधान फिल्में बननी चाहिए?
आज भोजपुरी या अन्य भाषा में जो फिल्में बन रही है, उनमें नारी प्रमुखता से उभर के आ रही है। यह सुखद् परिवर्तन की बेला है और सतयुग से होता आया है और अब कलियुग में हो रहा है कि विनाश के कोख से ही, विकास का जन्म होता है। मै समझती हूँ सब कुछ नार्मली हो रहा है। जरुरत इस परिवर्तन को सही नजरिये से देखने की है।
आखिर में ‘इंडिया सिने न्यूज’ के पाठकों और अपने दर्शकों से क्या कुछ कहना चाहेंगी ?
दर्शकों से बस ‘आई लव यू’ क्योकि आपसे हम हैं। आपका स्नेह और प्यार ही, मेरा आधार है। ‘इंडिया सिने न्यूज’ के लिए हमारी मनोकामना यही है कि यह दिन दूनी और रात चैगुनी उन्नति करे। आप सबको मेरा प्यार भरा आदाब!

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