कुक्कू माथुर की झंड हो गई

चंद्रमोहन शर्मा
कलाकार : सिद्धार्थ गुप्ता, आशीष बजाज, सिमरन कौर मुंडी, बृजेंद्र काला, अनूप पूरी, पल्लवी बतरा
निर्माता : शोभा कपूर, एकता कपूर, बिजॉय नाम्बियार
निर्देशक : अमन सचदेवा
गीत : मनोज यादव, परिचय, पलाश सेन, अंकुर तिवारी। संगीत: मिक्की, पलाश सेन
अवधि : 124mins
मूवी टाइप : Comedy
इस फिल्म को देखकर लगता है एकता कपूर को यकीनन ‘कुक्कू…’ जैसी फिल्म बनाने का आइडिया ‘फुकरे’ देखकर या इस फिल्म के कलेक्शन के आंकड़े देखने के बाद आया होगा। ‘फुकरे’ में एक-दो लोग नहीं, बल्कि फुकरों की अपनी एक अलग ही खास मंडली है। लेकिन यह फिल्म ‘फुकरे’ के आसपास भी नजर नहीं आती। बिखरी कहानी और फुल होमवर्क के बिना झटपट फिल्म बनाने और रिलीज करने की जल्दबाजी में फिल्म के डायरेक्टर अमन कुछ ऐसे उलझे कि करीब दो घंटे की फिल्म भी कई टुकडों में बंटी नजर आती है। अगर ‘माता रानी के जागरण’ और ‘कृपा वाले बाबा जी’ जैसे फिल्म के कुछ टुकडों को निकाल दिया जाए तो फिल्म दर्शकों को निराश ही करती है। हां, ऐसी फिल्में अब बनने लगी हैं, तो अपने दमखम पर उन न्यूकमर्स को भी स्क्रीन पर अपनी मौजूदगी दिखाने का चांस मिलने लगा है जो नामी मेकर्स की मेगाबजट फिल्मों में नजर नहीं आते। लेकिन ऐसे प्रॉजेक्ट को अगर डायरेक्टर और प्रॉडक्शन कंपनी पूरी ईमानदारी के साथ न बनाए, तो यकीनन कुक्कू के साथ-साथ फिल्म की भी झंड होनी तय रहता है।

कहानी: बारहवी पास सिद्धार्थ गुप्ता (कुक्कू) और रॉनी (आशीष जुनेजा) अच्छे दोस्त है। कुक्कू के पापा का एक ही सपना है, कुक्कू स्टडी में अव्वल रहे और टॉप पोजिशन पर नौकरी करे। कुक्कू का रिजल्ट आता है तो पापा का यह सपना बिखर कर रह जाता है। वैसे इन दोनों दोस्तों के भी अपने-अपने सपने हैं, जो रिजल्ट आने के बाद चकनाचूर हो गए। कुक्कू रेस्ट्रॉन्ट खोलना चाहता है, क्योंकि वह एक बेहतरीन कुक है। रॉनी को उसकी फैमिली अपने पुश्तैनी बिजनेस, यानी गारमेंट्स शॉप, में लगा देती है। कुक्कू मिताली (सिमरन कौर मुंडी) को दिल ही दिल में प्यार करता है, लेकिन बयां नहीं कर पाता। कुक्कू के सपने टूट रहे हैं कि तभी उसकी मुलाकाता कानपुर वाले प्रभाकर भैया (अमित सयाल) से होती है। प्रभाकर भैया से मिलने के बाद कुक्कू को लगता है अब उसके सपने साकार हो जाएंगे। ऐसा भी मुकाम आता है जब इन दोनों की राहें अलग-अलग हो जाती हैं।

ऐक्टिंग: कुक्कू और रॉनी के किरदारों में सिद्धार्थ और आशीष खूब जमे हैं। पूरी फिल्म इन दोनों किरदारों के आसपास टिकी है, लेकिन कुछ सीन्स में दोनों के चेहरे बुझे-बुझे नजर आते हैं। ऐसे किरदारों में जिस तरह की जबर्दस्त एनर्जी होनी चाहिए, वैसी इनके चेहरों पर कम ही सीन्स में दिखाई दी। अन्य कलाकारों में कानपुर वाले प्रभाकर भैया के रोल में अमित सयाल का जवाब नहीं। कृपा वाले बाबा जी के किरदार में बृजेंद्र काला सौ फीसदी फिट हैं।

निर्देशन: डायरेक्टर अमन सचदेवा की इस फिल्म को प्रमोशन में टोटली कॉमिडी फिल्म बताया गया, लेकिन अमन पूरी फिल्म तो आधी से भी कम फिल्म में ही कॉमिडी का तड़का लगा पाए। बेशक उनका आइडिया बेहतरीन है, लेकिन स्क्रीनप्ले और संवादों में उन्होंने कुछ खास नहीं किया। यही वजह है चंद बेहतरीन कॉमिडी सीन्स होने के बावजूद दर्शकों को लगता है, जैसे उन्हें ठगा गया हो। हां, अमन ने माता के जागरण, निर्मल बाबा की याद दिलाता एक सीन और हरियाणवी फिल्म की शूटिंग के सीन्स पर अच्छी मेहनत की है और यही सीन्स हैं, जब आपको खुलकर हंसने का मौका मिलता है।

संगीत: ‘वेलकम मैया’ गाने का फिल्मांकन बेहतरीन है और इसे ऐसे मजेदार ढंग से फिल्माया गया है, जो हॉल से बाहर आने के बाद भी कुछ पल याद रहता है।

क्यों देखें: फिल्म का सब्जेक्ट मजेदार है। फैमिली के साथ एक बार देखने जा सकते हैं।
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ऐक्टिंग: कुक्कू और रॉनी के किरदारों में सिद्धार्थ और आशीष खूब जमे हैं। पूरी फिल्म इन दोनों किरदारों के आसपास टिकी है, लेकिन कुछ सीन्स में दोनों के चेहरे बुझे-बुझे नजर आते हैं। ऐसे किरदारों में जिस तरह की जबर्दस्त एनर्जी होनी चाहिए, वैसी इनके चेहरों पर कम ही सीन्स में दिखाई दी। अन्य कलाकारों में कानपुर वाले प्रभाकर भैया के रोल में अमित सयाल का जवाब नहीं। कृपा वाले बाबा जी के किरदार में बृजेंद्र काला सौ फीसदी फिट हैं।

निर्देशन: डायरेक्टर अमन सचदेवा की इस फिल्म को प्रमोशन में टोटली कॉमिडी फिल्म बताया गया, लेकिन अमन पूरी फिल्म तो आधी से भी कम फिल्म में ही कॉमिडी का तड़का लगा पाए। बेशक उनका आइडिया बेहतरीन है, लेकिन स्क्रीनप्ले और संवादों में उन्होंने कुछ खास नहीं किया। यही वजह है चंद बेहतरीन कॉमिडी सीन्स होने के बावजूद दर्शकों को लगता है, जैसे उन्हें ठगा गया हो। हां, अमन ने माता के जागरण, निर्मल बाबा की याद दिलाता एक सीन और हरियाणवी फिल्म की शूटिंग के सीन्स पर अच्छी मेहनत की है और यही सीन्स हैं, जब आपको खुलकर हंसने का मौका मिलता है।

संगीत: ‘वेलकम मैया’ गाने का फिल्मांकन बेहतरीन है और इसे ऐसे मजेदार ढंग से फिल्माया गया है, जो हॉल से बाहर आने के बाद भी कुछ पल याद रहता है।

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